बुधवार, जून 19, 2024
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Success Story : नौकरी छोड़ चार दोस्तों ने खड़ी की 100 कड़ोर की कंपनी, डेयरी फार्म से दे रहे हजारों लोगों को रोजगार

Success Story : यदि किसी के पास Chartered Accountant की Degree हो, तो वह इंसान अवश्य ही एक अच्छा करियर ओप्सन चाहेगा. वह अपनी आगे की जिंदगी भी आराम से एक Job Safety के साथ गुजर करेगा.

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परंतु आज हम आपको चार ऐसे दोस्तों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इन डिग्रियों के होने के बावजूद अपने सुनहरे करियर को छोड़ बिजनेस की शुरुआत की.

शुरू में उन्हें काफी नकारात्मक चीजों से गुजरना पड़ा. पर वर्तमान में इनका टर्नओवर करोड़ों का है. साथ ही यह लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं.

चलिये, जानते हैं इन चार दोस्तों व इनके बिजनेस व सफलता की यह स्टोरी…

कैसे हुई थी शुरूआत

आपको बता दे कि सबसे पहले तो तीन दोस्तों ने Corporate Sector को छोड़ यह बिजनेस शुरू किया. इसके बाद चौथे दोस्त जो FMCG जुड़ा था, वह भी इन लोगों के साथ जुड़ा.

शुरू में इन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. पहली ही महीने में इनकी लगभग आधी पूंजी डूब गयी. इसके बाद वे लगभग दिवालिया होने के कगाड़ पर थे. परंतु इतने के बाद भी इन्होंने हार नहीं मानी.

वे आगे बढते रहे. अब इनके जीवन में एक ऐसा समय है, जब इनका टर्नओवर करोड़ों का है. इनका टर्नओवर 225 करोड़ से भी ज्यादा है.

डेयरी फॉर्म से शुरू किया बिजनेस

इन चार दोस्तों – राकेश शर्मा, अभिनव शाह, अभिषेक राज और हर्ष ठक्कर ने इस बिजनेस की शुरुआत की थी. इन चारों की दोस्ती कॉलेज में पढाई के दौरान हुई थी.

इन चारों ने अपने सेविंग्स के पैसे को मिलाकर लगभग 1 करोड़ रुपये इकट्ठा किये. इन पैसों से इन्होंने एक डेयरी फार्म की शुरूआत की. यह रांची के पास ओरमांझी में एक एकड़ जमीन खरीद कर फार्म शुरू की.

आपको बता दें कि अभिनव शाह ने कानपुर में जाकर डेयरी फंर्मिमग की ट्रेनिंग भी ली है.

पहले ही महीने सहना पड़ा भारी नुकसान

डेयरी की शुरुआत में ही पहले माह में उन्हें भारी नुकसान सहना पड़ा. दरअसल, शुरू में उन्होंने पंजाब के खन्ना से होल्स्टीन फ्राइजियन नस्ल की 40 गायें खरीदी थी. संक्रमण के कारण इनमें से 26 गायों की मौत हो गयी. इस कारण इन्हें का भारी नुकसान सहना पड़ा.

इसके बावजूद इन्होंने हार नहीं मानी. अब इन्होंने बैकअप प्लान के 50 लाख रुपये जुटाया. इसके बाद बिहार से गायें खरीदी. ये घर-घर जाकर लोगों तक दूध पहुंचाया करते.

26 लाख रुपये रहा पहले साल की टर्नओवर

इन्होंने पहले डेयरी का बिजनेस राया नाम से शुरू किया था. शुरूआती दिनों में प्रतिदिन 300 लीटर दूध का उत्पादन होता था. यह बढ़कर 6 महीनों में 1000 लीटर तक पहुंच गया.

इनके अनुसार, दूध किसी ब्रांड के नाम से बेची जाने वाली चीज़ नहीं. इसीलिए 7-8 लोग रखे थे. ये रांची के 3 अलग-अलग इलाकों में दूध वितरण का काम करते थे. पहले साल इनका टर्नओवर लगभग 26 लाख रुपये रहा.

बरबीघा में लगाया प्रथम Milk Chilling Plant

इन्होंने काम को आगे बढ़ाने के लिए एक कंपनी से Funding लिया. इससे बिहार के बरबीघा में प्रथम Milk Chilling Plant लगाया.

इस प्लांट से 40 गांवों के दूध उत्पादक व पशुपालन जुड़े. दो माह बाद मई में पतरातू में 50 हजार लीटर क्षमता वाली पहला Processing & Packaging Plant लगाया. पतरातू रांची से 35 किमी दूर स्थित है.

एक वर्ष में लगभग 25 हजार लीटर दूध प्रतिदिन वितरित होने लगा.

जमशेदपुर व बिहार में लगाया दूसरा व तीसरा प्लांट

इसके बाद जमशेदपुर व बिहार में दूसरा व तीसरा प्लांट लगाया. जमशेदपुर के पास चांडिल में 80 हजार लीटर की क्षमता वाली दूसरा Processing & Packaging Plant लगाया. वही बिहार के आरा जिले में तीसरा प्लांट लगाया.

इसी दौरान यह कंपनी की शुरुआत करने वाले चार दोस्तों में से दो अलग हो गए. अलग होने की वजह कोई निजी कारण था.

कई नए प्रोडक्टस को किया लांच

आपको बताये कि इसके बाद कंपनी ने मार्केट में कई नए प्रोडक्टस लांच किया. कंपनी ने दही, छाछ, पेड़ा , पनीर व रबड़ी जैसे कई प्रोडक्टस लांच किये. इसके अलावे सालसा रायता नामक एक विशेष प्रोडेक्ट को भी लांच किया जाना है.

आपको बता दें कि वर्तमान समय में प्रतिदिन लगभग 1 लाख 20 हजार लीटर दूध व 30 हजार लीटर Milk Products की बिक्री करती है.

इनके Business Model के बारे में देश-विदेशों के स्कूल में भी बताया जाता है. साथ ही इन्हें Entrepreneurship के लिए कई Awards भी मिल चुके हैं.

पश्चिम बंगाल में करेगी बिजनेस का विस्तार

अब यह कंपनी जल्द ही पश्चिम बंगाल में भी बिजनेस का विस्तार करने वाली है. इस वर्ष अप्रैल माह के बाद कंपनी के 10 साल पूरे हो जायेगा.

बिहार व झारखंड में सफलता के बाद अब यह पश्चिम बंगाल में बिजनेस का विस्तार करेगी. इसके लिए योजना तैयार की जा रही है.

आपको बता दें कि कंपनी 450 स्टाफ है. रोजाना काम से जुड़े लगभग 1000 व्यक्ति नियोजित हैं.

ऑसम डेयरी बिहार व झारखंड से प्रतिदिन लगभग 20,000 किसानों व पशुपालकों से दूध खरीदती है.

लगभग 250 Distributor और 8000 से अधिक Retail Sellers कंपनी के Supply Chain से जुड़े हैं.

इस प्रकार यदि देखा जाए तो लगभग 30,000 लोगों को ऑसम डेयरी रोजगार दे रहा है.

इस तरह से हमने ऑसम डेयरी की सफलता के बारे में जाना. साथ ही जाना यह किस प्रकार लोगों को रोजगार को मुहैया करा रही है. इसके Business Model की चर्चा विदेशों तक हैं.

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Rahul
Rahulhttps://nearnews.in
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Success Story : यदि किसी के पास Chartered Accountant की Degree हो, तो वह इंसान अवश्य ही एक अच्छा करियर ओप्सन चाहेगा. वह अपनी आगे की जिंदगी भी आराम से एक Job Safety के साथ गुजर करेगा.

परंतु आज हम आपको चार ऐसे दोस्तों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इन डिग्रियों के होने के बावजूद अपने सुनहरे करियर को छोड़ बिजनेस की शुरुआत की.

शुरू में उन्हें काफी नकारात्मक चीजों से गुजरना पड़ा. पर वर्तमान में इनका टर्नओवर करोड़ों का है. साथ ही यह लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं.

चलिये, जानते हैं इन चार दोस्तों व इनके बिजनेस व सफलता की यह स्टोरी…

कैसे हुई थी शुरूआत

आपको बता दे कि सबसे पहले तो तीन दोस्तों ने Corporate Sector को छोड़ यह बिजनेस शुरू किया. इसके बाद चौथे दोस्त जो FMCG जुड़ा था, वह भी इन लोगों के साथ जुड़ा.

शुरू में इन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. पहली ही महीने में इनकी लगभग आधी पूंजी डूब गयी. इसके बाद वे लगभग दिवालिया होने के कगाड़ पर थे. परंतु इतने के बाद भी इन्होंने हार नहीं मानी.

वे आगे बढते रहे. अब इनके जीवन में एक ऐसा समय है, जब इनका टर्नओवर करोड़ों का है. इनका टर्नओवर 225 करोड़ से भी ज्यादा है.

डेयरी फॉर्म से शुरू किया बिजनेस

इन चार दोस्तों – राकेश शर्मा, अभिनव शाह, अभिषेक राज और हर्ष ठक्कर ने इस बिजनेस की शुरुआत की थी. इन चारों की दोस्ती कॉलेज में पढाई के दौरान हुई थी.

इन चारों ने अपने सेविंग्स के पैसे को मिलाकर लगभग 1 करोड़ रुपये इकट्ठा किये. इन पैसों से इन्होंने एक डेयरी फार्म की शुरूआत की. यह रांची के पास ओरमांझी में एक एकड़ जमीन खरीद कर फार्म शुरू की.

आपको बता दें कि अभिनव शाह ने कानपुर में जाकर डेयरी फंर्मिमग की ट्रेनिंग भी ली है.

पहले ही महीने सहना पड़ा भारी नुकसान

डेयरी की शुरुआत में ही पहले माह में उन्हें भारी नुकसान सहना पड़ा. दरअसल, शुरू में उन्होंने पंजाब के खन्ना से होल्स्टीन फ्राइजियन नस्ल की 40 गायें खरीदी थी. संक्रमण के कारण इनमें से 26 गायों की मौत हो गयी. इस कारण इन्हें का भारी नुकसान सहना पड़ा.

इसके बावजूद इन्होंने हार नहीं मानी. अब इन्होंने बैकअप प्लान के 50 लाख रुपये जुटाया. इसके बाद बिहार से गायें खरीदी. ये घर-घर जाकर लोगों तक दूध पहुंचाया करते.

26 लाख रुपये रहा पहले साल की टर्नओवर

इन्होंने पहले डेयरी का बिजनेस राया नाम से शुरू किया था. शुरूआती दिनों में प्रतिदिन 300 लीटर दूध का उत्पादन होता था. यह बढ़कर 6 महीनों में 1000 लीटर तक पहुंच गया.

इनके अनुसार, दूध किसी ब्रांड के नाम से बेची जाने वाली चीज़ नहीं. इसीलिए 7-8 लोग रखे थे. ये रांची के 3 अलग-अलग इलाकों में दूध वितरण का काम करते थे. पहले साल इनका टर्नओवर लगभग 26 लाख रुपये रहा.

बरबीघा में लगाया प्रथम Milk Chilling Plant

इन्होंने काम को आगे बढ़ाने के लिए एक कंपनी से Funding लिया. इससे बिहार के बरबीघा में प्रथम Milk Chilling Plant लगाया.

इस प्लांट से 40 गांवों के दूध उत्पादक व पशुपालन जुड़े. दो माह बाद मई में पतरातू में 50 हजार लीटर क्षमता वाली पहला Processing & Packaging Plant लगाया. पतरातू रांची से 35 किमी दूर स्थित है.

एक वर्ष में लगभग 25 हजार लीटर दूध प्रतिदिन वितरित होने लगा.

जमशेदपुर व बिहार में लगाया दूसरा व तीसरा प्लांट

इसके बाद जमशेदपुर व बिहार में दूसरा व तीसरा प्लांट लगाया. जमशेदपुर के पास चांडिल में 80 हजार लीटर की क्षमता वाली दूसरा Processing & Packaging Plant लगाया. वही बिहार के आरा जिले में तीसरा प्लांट लगाया.

इसी दौरान यह कंपनी की शुरुआत करने वाले चार दोस्तों में से दो अलग हो गए. अलग होने की वजह कोई निजी कारण था.

कई नए प्रोडक्टस को किया लांच

आपको बताये कि इसके बाद कंपनी ने मार्केट में कई नए प्रोडक्टस लांच किया. कंपनी ने दही, छाछ, पेड़ा , पनीर व रबड़ी जैसे कई प्रोडक्टस लांच किये. इसके अलावे सालसा रायता नामक एक विशेष प्रोडेक्ट को भी लांच किया जाना है.

आपको बता दें कि वर्तमान समय में प्रतिदिन लगभग 1 लाख 20 हजार लीटर दूध व 30 हजार लीटर Milk Products की बिक्री करती है.

इनके Business Model के बारे में देश-विदेशों के स्कूल में भी बताया जाता है. साथ ही इन्हें Entrepreneurship के लिए कई Awards भी मिल चुके हैं.

पश्चिम बंगाल में करेगी बिजनेस का विस्तार

अब यह कंपनी जल्द ही पश्चिम बंगाल में भी बिजनेस का विस्तार करने वाली है. इस वर्ष अप्रैल माह के बाद कंपनी के 10 साल पूरे हो जायेगा.

बिहार व झारखंड में सफलता के बाद अब यह पश्चिम बंगाल में बिजनेस का विस्तार करेगी. इसके लिए योजना तैयार की जा रही है.

आपको बता दें कि कंपनी 450 स्टाफ है. रोजाना काम से जुड़े लगभग 1000 व्यक्ति नियोजित हैं.

ऑसम डेयरी बिहार व झारखंड से प्रतिदिन लगभग 20,000 किसानों व पशुपालकों से दूध खरीदती है.

लगभग 250 Distributor और 8000 से अधिक Retail Sellers कंपनी के Supply Chain से जुड़े हैं.

इस प्रकार यदि देखा जाए तो लगभग 30,000 लोगों को ऑसम डेयरी रोजगार दे रहा है.

इस तरह से हमने ऑसम डेयरी की सफलता के बारे में जाना. साथ ही जाना यह किस प्रकार लोगों को रोजगार को मुहैया करा रही है. इसके Business Model की चर्चा विदेशों तक हैं.

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