Lac Cluster Factory Muzaffarpur : मुजफ्फरपुर में लाह की लहठी बनाने का कारोबार लम्बे समय से हो रहा है और मुजफ्फरपुर की लहठी काफी लोकप्रिय भी है. इस कारोबार ने हजारों लोग को रोजगार दिया है. हम आपको बता दें कि, आज का हमारा यह लेख शफा इक़बाल नाम की एक महिला को समर्पित है. आपको बता दें कि,
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मुजफ्फरपुर की रहने वाली शफा इक़बाल नाम की एक महिला ने लाह की लहठी बनाने का बिजनेस (Lacquer Lathi Making Business) शुरू किया है. शफा इक़बाल ने MSME की Refreshment Plan की सहायता से केशोपुर में Lac Cluster Factory की स्थापना की.
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हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, लाखों की संख्या में Lac Cluster Factory में लाह की लहठी तैयार की जाती है. इन लहठीयो की देश में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी खुब डिमांड है. मुजफ्फरपुर की बनी लहठी दूसरे जिलों, राज्यों और विदेशों तक भी जाती है.
लेकिन इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि, शफा ने गांव की कई गरीब और बेसहारा महिलाओं को इस कारोबार (Lacquer Lathi Making Business) के माध्यम से रोजगार दिलाकर उनकी ज़िंदगी बदल दी है.
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अपना काम शुरू करने के लिए आईटी कंपनी में छोड़ा जॉब
हम आपको बता दें कि, पहले एक आईटी कंपनी में शफा काम करती थीं, उन्हें वहां अच्छी खासी तनख्वाह मिलती थी. लेकिन किसी कारणवश उन्हें घर लौटना पड़ा. अपने घर वापस आकर एक प्राइवेट स्कूल में शफा ने शिक्षिका की नौकरी करनी शुरू की. लेकिन शफा अपना खुद का काम शुरू करना चाहती थी. ‘कहते है न, मन जिसमें लग जाए, उसके अलावा कुछ और दिखता ही नहीं…वैसा ही हुआ.’

उन्होंने Lacquer Cluster की शुरुआत करके इसके सहायता से गांव की बेरोजगार महिलाओं को रोजगार देने का निर्माण लिया. उन्होंने अपने गांव की बेसहाय,अनपढ़, और गरीब महिलाओं को बुलवा कर उनसे पूछा कि अपने क्षेत्र में एक कम्पनी खुल रही है, क्या आप लोग काम करोगी?
मशहूर लाह कलस्टर की संचालिका शफा इक़बाल ने बताया कि काम करने के लिए महिलाएं तैयार थीं, लेकिन उन्हें इस काम के बारे कोई जानकारी नहीं थी. ऐसे में शफा ने उनकी ट्रेनिंग करवाई और आज यहां काम करने वालीं महिलाएं आराम से 5 हजार से लेकर 10 हजार रुपये महीना तक कमा रही हैं.
बदल गई महिलाओं की जिंदगी
हम आपकी जानकारी के लिए बता देना चाहते हैं कि, फरजाना परवीन नामक एक महिला ने बताया कि, उसके पति की दिमागी हालत खराब हो गई थी. जिससे बाद उसे अपनी दो बेटियों को लेकर मायके में रहना पड़ा. फरजाना केवल छठी कक्षा तक ही पढ़ी थी जिस कारण उसे नौकरी मिल पाना भी मुश्किल था.
उनकी आर्थिक स्थिति पहले काफ़ी खराब थी. बच्चों की स्कूल की फ़ीस तक देना मुश्किल हो गया था। ऐसे में उसे शफा के कारोबार (Lacquer Lathi Making Business) ने सहारा दिया.अब वह आसानी से अपने परिवार का खर्च उठा रहीं हैं.
इसी प्रकार अनीता देवी नाम की एक महिला ने बताया कि, वह अपने घर में अकेली रहती थीं। शफा की फ़ैक्ट्री के बारे में पता चलने के बाद उसने भी वहां काम करने का फ़ैसला किया. अनीता देवी ने कहा कि, हमने सोचा कि घर पर अकेले बैठ कर क्या करेंगे? तो यहां काम करने चले आते है. मैंने यहां काफ़ी कुछ सीखा है.’
निभा देवी ने बताया कि, जब से शफा की फ़ैक्ट्री खुली है, तब से वह यहां काम कर रही हैं. यहां काम करके उन्हें पैसे के साथ काफ़ी कुछ सीखने को भी मिलता है.
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