मंगलवार, जून 18, 2024
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New Education Policy 2020: स्कूली शिक्षा में 10+2 खत्म, 5+3+3+4 की नई व्यवस्था, एमफिल कोर्स को किया गया खत्म

नई शिक्षा नीति 2020 को कैबिनेट का मंज़ूरी मिल गया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रेस वार्ता करके इसकी जानकारी दी हैं.

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बता दें कि इससे पहले 1986 में शिक्षा नीति को लागू कीया गया था. 1992 में शिक्षा नीति में कुछ संशोधन किया गया था. मतलब 34 साल बाद देश में एक नई शिक्षा नीति को लागू किया जा रहा है.

पूर्व इसरो प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों के समिति द्वारा इसका मसौदा को तैयार किया गया था, जिसे नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी हैं.

नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बड़े बदलाव किए गए हैं।

नई शिक्षा नीति-2020 की मुख्य बातें

– नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पाँचवी क्लास तक मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई के माध्यम को रखने की बात कही गई है. जीसे क्लास आठ या उससे आगे भी बढ़ाया जा सकता है.

– विदेशी भाषा की पढ़ाई अब सेकेंडरी लेवल से होगी. हालांकि नई शिक्षा नीति 2020 में यह भी बताया गया है कि किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाएगा।

– स्कूली शिक्षा में साल 2030 तक 100% जीईआर (Gross Enrolment Ratio) के साथ साथ माध्यमिक स्तर तक Education फ़ॉर ऑल के लक्ष्य को रखा गया है.

– स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह अब 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना को लागू किया जाएगा जो क्रमशः 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18 उम्र के बच्चों के लिए है।

– इस नई शिक्षा नीति प्रणाली में प्री स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा और तीन साल की आंगनवाड़ी होगा।

– इसके अंतर्गत पढ़ने-लिखने और जोड़-घटाव (गणना) की बुनियादी योग्यता पर ज्यादा ज़ोर दिए जाएंगे। बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान की प्राप्ति को सही ढंग से सीखने हेतु अत्यंत ज़रूरी एवं पहली आवश्यकता मानते हुए ‘एनईपी 2020’ में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के तरफ से “बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन” की स्थापना किए जाने का विशेष जोर दिया गया है।

– NCERT 8 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (NCPFECCE) के लिए एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा को विकसित करेगा।

– स्कूलों में शैक्षणिक धाराओं, पाठ्येतर गतिविधियों और व्या’वसायिक शिक्षा के बीच ख़ास अंतर नहीं किये जायेंगे।

– “मानव संसाधन विकास मंत्रालय” का नाम बदल कर “शिक्षा मंत्रालय” कर दिया गया है इसका मतलब यह है कि रमेश पोखरियाल निशंक देश के अब शिक्षा मंत्री कहलाएंगे।

– GDP का छह फीसदी शिक्षा में लगाने का लक्ष्य रखने का प्रयास जो की अभी 4.43 फ़ीसद है.

– 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य इस नई शिक्षा नीति के अंतर्गत रखा गया हैं।

– छठी क्लास से ही वोकेशनल कोर्स को शुरू किए जाएंगे। इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद इंटर्नशिप भी करवाई जाएगी। साथ ही साथ म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। इन्हें पाठयक्रम में लागू किए जाएंगे।

– एक सिंगल रेगुलेटर उच्च शिक्षा के लिए रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर). मतलब अब यूजीसी और एआईसीटीई को समाप्त कर दिया जाएगा और पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक ही नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किये जायेंगे।

– पहली बार शिक्षा नीति में मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम को लागू किया गया है. आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं. आज की व्यवस्था में अगर कोई चार साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे का पढ़ाई नही पढ़ पाता हैं तो आपके पास कोई दूसरा उपाय नहीं होता,

लेकिन वहिं मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डि’प्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगा। इससे उन छात्रों को सबसे ज्यादा फ़ायदा होगा जिनकी पढ़ाई किसी कारण से बीच मे छूट जाती है।

Unlock 3 Guidelines: अब 31 अगस्त तक लॉक डाउन लेकिन जिम खोलने की अनुमति, स्कूल-कॉलेज रहेंगे बंद, नाइट कर्फ्यू भी हटा…

– उच्च शिक्षा में भी कई तरह के बदलाव किए गए हैं. जो छात्र रिसर्च करना चाहते होंगे उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम रहेगा. जो छात्र नौकरी में जाना चाहते हैं तो उनके लिए तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करना रहेगा।

लेकिन जो छात्र रिसर्च में जाना चाहते हैं तो वो एक साल के एमए (MA) के साथ साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के उपरांत सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं। उन्हें एमफ़िल (M.Phil) करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

– शोधार्थी छात्रों के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) का स्थापना किया जाएगा। एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध के तरीके को और भी सक्षम बनाना होगा। एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के द्वारा शासित किया जाएगा।

– ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किया जाएगा। वर्चुअल लैब विकसित किया जा रहा है और एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (NETF)को भी बनाया जा रहा है।

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New Education Policy 2020: स्कूली शिक्षा में 10+2 खत्म, 5+3+3+4 की नई व्यवस्था, एमफिल कोर्स को किया गया खत्म

नई शिक्षा नीति 2020 को कैबिनेट का मंज़ूरी मिल गया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रेस वार्ता करके इसकी जानकारी दी हैं.

बता दें कि इससे पहले 1986 में शिक्षा नीति को लागू कीया गया था. 1992 में शिक्षा नीति में कुछ संशोधन किया गया था. मतलब 34 साल बाद देश में एक नई शिक्षा नीति को लागू किया जा रहा है.

पूर्व इसरो प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों के समिति द्वारा इसका मसौदा को तैयार किया गया था, जिसे नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी हैं.

नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बड़े बदलाव किए गए हैं।

नई शिक्षा नीति-2020 की मुख्य बातें

– नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पाँचवी क्लास तक मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई के माध्यम को रखने की बात कही गई है. जीसे क्लास आठ या उससे आगे भी बढ़ाया जा सकता है.

– विदेशी भाषा की पढ़ाई अब सेकेंडरी लेवल से होगी. हालांकि नई शिक्षा नीति 2020 में यह भी बताया गया है कि किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाएगा।

– स्कूली शिक्षा में साल 2030 तक 100% जीईआर (Gross Enrolment Ratio) के साथ साथ माध्यमिक स्तर तक Education फ़ॉर ऑल के लक्ष्य को रखा गया है.

– स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह अब 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना को लागू किया जाएगा जो क्रमशः 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18 उम्र के बच्चों के लिए है।

– इस नई शिक्षा नीति प्रणाली में प्री स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा और तीन साल की आंगनवाड़ी होगा।

– इसके अंतर्गत पढ़ने-लिखने और जोड़-घटाव (गणना) की बुनियादी योग्यता पर ज्यादा ज़ोर दिए जाएंगे। बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान की प्राप्ति को सही ढंग से सीखने हेतु अत्यंत ज़रूरी एवं पहली आवश्यकता मानते हुए ‘एनईपी 2020’ में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के तरफ से “बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन” की स्थापना किए जाने का विशेष जोर दिया गया है।

– NCERT 8 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (NCPFECCE) के लिए एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा को विकसित करेगा।

– स्कूलों में शैक्षणिक धाराओं, पाठ्येतर गतिविधियों और व्या’वसायिक शिक्षा के बीच ख़ास अंतर नहीं किये जायेंगे।

– “मानव संसाधन विकास मंत्रालय” का नाम बदल कर “शिक्षा मंत्रालय” कर दिया गया है इसका मतलब यह है कि रमेश पोखरियाल निशंक देश के अब शिक्षा मंत्री कहलाएंगे।

– GDP का छह फीसदी शिक्षा में लगाने का लक्ष्य रखने का प्रयास जो की अभी 4.43 फ़ीसद है.

– 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य इस नई शिक्षा नीति के अंतर्गत रखा गया हैं।

– छठी क्लास से ही वोकेशनल कोर्स को शुरू किए जाएंगे। इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद इंटर्नशिप भी करवाई जाएगी। साथ ही साथ म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। इन्हें पाठयक्रम में लागू किए जाएंगे।

– एक सिंगल रेगुलेटर उच्च शिक्षा के लिए रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर). मतलब अब यूजीसी और एआईसीटीई को समाप्त कर दिया जाएगा और पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक ही नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किये जायेंगे।

– पहली बार शिक्षा नीति में मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम को लागू किया गया है. आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं. आज की व्यवस्था में अगर कोई चार साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे का पढ़ाई नही पढ़ पाता हैं तो आपके पास कोई दूसरा उपाय नहीं होता,

लेकिन वहिं मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डि’प्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगा। इससे उन छात्रों को सबसे ज्यादा फ़ायदा होगा जिनकी पढ़ाई किसी कारण से बीच मे छूट जाती है।

Unlock 3 Guidelines: अब 31 अगस्त तक लॉक डाउन लेकिन जिम खोलने की अनुमति, स्कूल-कॉलेज रहेंगे बंद, नाइट कर्फ्यू भी हटा…

– उच्च शिक्षा में भी कई तरह के बदलाव किए गए हैं. जो छात्र रिसर्च करना चाहते होंगे उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम रहेगा. जो छात्र नौकरी में जाना चाहते हैं तो उनके लिए तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करना रहेगा।

लेकिन जो छात्र रिसर्च में जाना चाहते हैं तो वो एक साल के एमए (MA) के साथ साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के उपरांत सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं। उन्हें एमफ़िल (M.Phil) करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

– शोधार्थी छात्रों के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) का स्थापना किया जाएगा। एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध के तरीके को और भी सक्षम बनाना होगा। एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के द्वारा शासित किया जाएगा।

– ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किया जाएगा। वर्चुअल लैब विकसित किया जा रहा है और एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (NETF)को भी बनाया जा रहा है।

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