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Removes Alcohol Intoxication In 2 Minutes : 2 मिनट में उतर जायेगा शराब का सारा नशा

Removes Alcohol Intoxication In 2 Minutes : शराब पीने के बाद अक्सर लोग नशे में इतने चूर हो जाते हैं कि होश खो बैठते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. क्योंकि हम आप सभी को एक ऐसी संजीवनी बूटी के बारे में बताएंगे जो 2 मिनट में शराब का सारा नशा उतार देंगी (Removes Alcohol Intoxication In 2 Minutes). हम आपको बता दें कि,

छत्तीसगढ़ के जंगलों में पाया जाने वाला यह वृक्ष किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है. इस दुर्लभ वृक्ष का नाम दहीमन है. इस पेड़ के फायदों के बारे में सुनकर आप इन सब बातों को काल्पनिक कहेंगे, लेकिन यह सच है. इस वृक्ष के फल कैंसर, ब्लड प्रेशर, पीलिया और मानसिक रूप से पीड़ित लोगों के लिए संजीवनी हैं.

इसके साथ ही, यह 2 मिनट में शराब का नशा भी उतार देता है (Removes Alcohol Intoxication In 2 Minutes). इस पेड़ की पत्तियों की एक खासियत यह भी है कि, अगर आप इस पर कुछ लिखा जाएं तो उसके अक्षर उभरकर दिखाई देने लगते हैं. माना जाता है कि प्राचीन काल में गुप्तचरों द्वारा इस पत्ते पर संदेश लिखकर आदान-प्रदान किया जाता था.

Removes Alcohol Intoxication In 2 Minutes : आयुर्वेद डॉक्टर ने बताए औषधीय महत्व

आयुर्वेद के डॉक्टर पंडित नागेंद्र नारायण शर्मा का कहना कि, दहिमन हमारे क्षेत्र में पाया जाने वाला एक लाभकारी और चमत्कारी पेड़ है. इसकी लकड़ी को लोग अपने गले में पहनते हैं. आयुर्वेद में इसके विभिन्न उपयोग बताए गए हैं. इसका फल ब्लड प्रेशर,

पीलिया के अलावा मानसिक रोगों (Mental Diseases) से पीड़ित लोगों के लिए संजीवनी है. इसके अलावा माना जाता है कि, शराब के नशे में डूबे व्यक्ति को इसके फल का रस पिलाने से 2 मिनट में नशा उतर जाता है (Removes Alcohol Intoxication In 2 Minutes). उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि, धीरे-धीरे यह वृक्ष विलुप्ति हो रहा है. अब बहुत कम ऐसे चमत्कारी पेड़ और औषधियां रह गई हैं.

आयुर्वेद डॉक्टर ने बताया कि, दहिमन मुख्य रूप से पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जंगलों में पाया जाता है. इसका औषधीय उपयोग काफी प्रचलित था. पुराने वैद्य और आयुर्वेदाचार्य इस पेड़ का उपयोग असाध्य बीमारियों के इलाज में करते थे.

इस औषधीय पेड़ में कई बायो एक्टिव कंपाउंड (Bio Active Compound) पाए जाते हैं, जो कई असाध्य बीमारियों को ठीक करने में सक्षम हैं. इस कारण ही इसका दोहन हुआ, लेकिन संरक्षण की ओर किसी का ध्यान नहीं गया, जिससे यह संकटग्रस्त की श्रेणी में आ गया है.

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