Monday, September 27, 2021

बिहार में कॉलेज में लड़कियां नहीं लेंगी सेल्फी, जींस-टीशर्ट में खुले बाल लहराते हुए नहीं जाएंगी पढ़ने, नया आदेश जारी

PATNA : बिहार में लड़कियों को पढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए नीतीश सरकार के तरफ से नए-नए नियम कानून बनाये जा रहे हैं.

लड़कियों को प्रोत्साहन राशि (Incentives) भी दिया जा रहा है. यहां तक कि राज्य सरकार ने लड़कियों के लिए Medical College, Engineering College,

स्पोर्ट यूनिवर्सिटी आदि संस्थानों में सीटें भी आरक्षित कर दी है. लेकिन एक कॉलेज प्रशासन ने लड़कियों के लिए एक ऐसा नियम-कानून बनाया है,

जिसकी अब काफी आलोचना हो रही है. दरअसल कॉलेज में लड़कियों के सेल्फी लेने और खुले बाल पढ़ने जाने पर रोक लगा दिया गया है.

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यह मामला बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर जिले से जुड़ी है. दरअसल भागलपुर में स्थित सुंदरवती महिला कॉलेज प्रशासन के तरफ से नया ड्रेस कोड लागू किया गया है.

इस आदेश के साथ-साथ एक नया फरमान भी जारी किया गया है. जिसे लोग ‘तुगलकी फरमान’ करार दिए हैं. College Administration की ओर से जारी इस आदेश के अनुसार खुले बालों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

सुंदरवती महिला कॉलेज की प्रिंसिपल का यह कहना है कि कॉलेज कैंपस में लड़कियां मोबाइल से सेल्फी भी नहीं लेंगी. बाल खुले रखने वाली छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश नहीं दी जाएगी.

लड़कियां सिर्फ और सिर्फ एक चोटी या फिर दो चोटी में बाल बांधकर ही पढ़ने आएंगी. बताया जा रहा है कि कॉलेज की कमेटी ने यह बड़ा निर्णय लिया है. 

आदेश में यह कहा गया है कि लड़कियां सिर्फ रॉयल ब्ल्यू कुर्ता और सिर्फ सफ़ेद सलवार पहनेंगी. इसके साथ वे एक सफ़ेद दुपट्टा लेंगी.

साथ में सफ़ेद मोजा और काला जूता पहनेंगी. ये नियम गर्मी के दिनों में लागू रहेगा. रही बात जाड़े के मौसम की, तो जाड़े में लड़कियां रॉयल ब्लू ब्लेजर या कार्डिगन पहनकर ही पढ़ने के लिए कॉलेज आएंगी. 

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यह जानकारी मिली है कि सुंदरवती महिला कॉलेज में करीब डेढ़ हजार लड़कियां पढाई करती हैं. नए सेशन मतलब कि सत्र 2021-2023 में जिन्होंने एडमिशन लिया है,

ये आदेश सिर्फ उनके लिए जारी किया गया हैं. बाकायदा आदेश पत्र पर इसका भी जिक्र किया गया हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी RJD से जुड़े छात्रों ने इसे तुगलकी फरमान बताया है. तो अन्य छात्रों ने इसकी तुलना शरिया कानून से कर दी.

क्या होता है तुगलकी फरमान

हिंदी की एक वेबसाइट -जीके इन हिंदी’ के अनुसार बिना सोचे-समझे और बिना प्रजा के हितों का ध्यान में रखे सख्ती से लागू किए जाने वाले फैसलों को तुगलकी फरमान कहा जाता है.

जिसमें विचार-विमर्श और तर्क वितर्क ना किया गया हो और किसी एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को तरजीह दिया गया हो. तो ऐसे फैसलों को तुगलकी फरमान कहा जाता हैं.

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