Wednesday, July 28, 2021

बिहार में अनलॉक से जुड़ी सबसे बड़ी खबर, अब छह जुलाई से खुलने लगेगा शिक्षण संस्थान… जानिए गाइडलाइन

School College Re-opening in Bihar : बिहार में Unlock से जुड़ी यह सबसे बड़ी खबर हैं, बाजार के शर्तों के साथ खुलने के बाद अब Educational Institutions (शिक्षण-संस्थान) की बारी हैं.

कोरोना संक्रमण की स्थितियां सामान्य रहीं तो छह जुलाई के बाद से चरणबद्ध ढंग से राज्य में शिक्षण संस्थान खोले जाएंगे. Education Minister Vijay Kumar Chaudhary ने रविवार को इस संबंध में जानकारी दी.

उन्होंने स्‍पष्‍ट कर दिया कि यदि स्थिति में सुधार होता रहा तो बच्चों की सुरक्षा काे ध्यान में रखते हुए शशर्तों के साथ सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेजों को खोलने की तिथि तय की जाएगी. फिलहाल शिक्षा विभाग (Education Department) के स्तर से शिक्षण संस्थानों को खोलने की तैयारी चल रहा है.

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पहले चरण में खोले जाएंगे उच्च शिक्षण संस्थान

शिक्षा मंत्री (Minister of Education) ने यह बताया कि सभी बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में से एक है. बच्चों की जान जोखिम में डालकर शिक्षण संस्थान (educational institutions) नहीं खोले जा सकते.

छह जुलाई के बाद पहले चरण में विश्वविद्यालय साथ ही महाविद्यालय खोले जाएंगे. दूसरे चरण में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9वीं से 12वीं तक),

तीसरे चरण में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों (कक्षा एक से आठ तक) के बच्चों के लिए कक्षाएं शुरू किया जाएगा. अन्य शिक्षण संस्थानों (educational institutions) में विद्यार्थियों की उपस्थिति पर शिक्षा विभाग की ओर से विशेष रूप से Guidelines जारी होगा.

एक दिन में केवल 50 फीसद विद्यार्थी ही कक्षा में उपस्थित हो सकेंगे. शेष 50 फीसद अगले दिन आएंगे. सभी जिलों में कोरोना प्रोटोकाल (corona protocol) का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा.

बच्चों की पढ़ाई के प्रति सरकार गंभीर

शिक्षा मंत्री (Minister of Education) ने यह बताया कि सभी बच्चों की पढ़ाई को लेकर राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही हैं. हम शिक्षण संस्थानों (educational institutions) को खोलना इसलिए भी चाह रहे हैं कि

कोरोना महामारी (corona pandemic) के संक्रमण के चलते लगातार स्कूल-कालेज समेत अन्य सभी शिक्षण संस्थान बंद हैं और इससे बच्चों की पढ़ाई लगातार बाधित हैं. विशेषकर छोटे बच्चों की पढ़ाई बिल्कुल छूट से गया हैं.

जिसे फिर से पटरी पर लाना कठिन हो जाता हैं. उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों में अपनी पढ़ाई के प्रति एक जिम्मेदारी होती है, लेकिन छोटे बच्चे स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ ही शिक्षकों और सहपाठियों से संवाद के क्रम में ही बहुत कुछ सीखते हैं.

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