Friday, June 25, 2021

टेंशन बढ़ाने वाली खबर : हवा के रास्ते फैलता हैं कोरोना वायरस, स्टडी में वैज्ञानिकों को मिले सबूत

Near News, Corona Desk : कोरोना वायरस का यह दूसरा लहर पूरे देश में हाहाकार मचा दिया हैं. भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाभर के कई देशों में कोरोना के इस नए वैरिएंट का प्रकोप दिखाई दे रहा हैं.

भारत मे एक बार फिर लॉकडाउन लगने की कगार पर हैं. ऐसे में कोरोना वायरस को लेकर अलग-अलग रिसर्च किया जा रहा हैं. अभी हाल ही में मेडिकल पत्रिका लांसेट की एक रिपोर्ट में यह लिखा गया हैं कि

इस बात का ठोस सबूत मिला हैं जो बताते हैं कि Covid-19 में पाए जाने वाला Sars-coV02 Virus मुख्य रूप से हवा के जरिए फैलता हैं.

रिपोर्ट जारी करने वाले वैज्ञानिकों ने यह कहा हैं कि सुरक्षा मनदंडों में बदलाव करने की भी जरूरत हैं. इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने अपने बात का समर्थन करते हुए कई मजबूत तर्क भी पेश किए,

और कहा हैं कि इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं मिला हैं जो यह साबित कर सकें कि कोरोना वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता हैं.

अध्ययनों ने पहले ही संकेत दिया हैं कि कोरोना वायरस हवा के जरिए भी फैल सकता है, लेकिन यह अपने तरह का पहला ऐसा विश्लेषण है जो यह कहता है कि प्रमुख रूप से कोरोना वायरस के हवाई रास्ते के जरिए फैलने की संभावना हैं.

कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में, यह माना जाता था कि कोरोना वायरस तब फैलता हैं जब संक्रमित व्यक्ति के खांसने अथवा छींकने पर निकली छोटी बूंदे किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे दूषित कर देती हैं.

पिछले साल जुलाई में 32 देशों के करीब 200 वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को यह लिखा था की, इस बात के सबूत हैं कि कोरोना वायरस हवाई है.

University of Colorado Boulder के जोस-लुइस जिमेनेज ने कहा, “हवाई संक्रमण का समर्थन करने वाले सबूत भारी है, और बूंदों के संचरण का समर्थन करने वाली सबूत लगभग गैर-मौजूद है”

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अध्ययन के लेखकों में से एक, जिमेनेज ने PTI को बताया, “यह जरूरी है कि WHO और अन्य सार्वजनिक Health Agency ​​संचरण के अपने विवरण को वैज्ञानिक सबूत के अनुसार ढालें ​​ताकि शमन पर ध्यान केंद्रित किया जा सके”

अमेरिका ब्रिटेन, यूएस और कनाडा के विशेषज्ञों ने मिलकर यह रिपोर्ट तैयार किया हैं और इसकी समीक्षा करते हुए अपने सबूत के रूप में कई कारण भी बताए हैं.

कोरोना वायरस के सुपरस्प्रेडिंग इवेंट तेजी से SARS-CoV-2 वायरस को आगे ले जाता हैं. असल में यह वायरस महामारी के शुरुआती वाहक हो सकता हैं. ऐसे ट्रांसमिशन का बूंदों के जगह हवा के जरिए होना ज्यादा आसान हैं.

क्वरंटीन होटलों अथवा दूसरी जगहों पर एक।दूसरे से चिपके कमरों में रह रहे लोगों के बीच भी इस संक्रमण को देखा गया जबकि दोनों ही लोग एक दसूरे के कमरे में नहीं गए.

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रिसर्च में यह बताया गया है कि कोरोना वायरस का ट्रांसमिशन बाहर के बजाय अंदर अधिक होता हैं और अगर अंदर वेंटिलेशन हैं तो संभावना काफी कम हो जाता है.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया हैं कि यह कोरोना वायरस हवा में पाया गया और LAB में यह वायरस 3 घंटे तक हवा में बना रहा. कोरोना के मरीज के कमरों और गाड़ियों में इसके सैंपल मिलें.

इसके अलावें SARS-CoV-2 वायरस वाले मरीजों के अस्पतालों के एयर फिल्टर्स एवं बिल्डिंग में डक्ट्स मिले हैं जो की हवा के जरिए ही यहां तक पहुंच सकते हैं.

डॉक्टरों ने यह कहा कि, वायरस हवा से नहीं फैलता हैं इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है. अगर वैज्ञानिकों के दिए गए इन सुझावों को स्वीकार कर लिया जाता हैं तो पूरी दुनिया की कोरोना वायरस से लड़ने की रणनीति पर बड़ा असर पड़ेगा.

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